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नैनीताल: जानें सरोवर नगरी का इतिहास, अंग्रेजों ने धोखे से हथियाईं थी जिसकी जमीन

Nainital history in hindi

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नैनीताल: जानें सरोवर नगरी का इतिहास, अंग्रेजों ने धोखे से हथियाईं थी जिसकी जमीन

Nainital history in hindi: झील में डुबाने की धमकी देकर ब्रिटिश व्यापारी पीटर बैरन ने करवाए थे स्टांप पेपर पर वास्तविक मालिक दान सिंह थोकदार के हस्ताक्षर….

Nainital history in hindi
उत्तराखंड अपने पर्यटक स्थलों व खूबसूरत वादियों के लिए पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है और इतना ही नही यहाँ के पर्यटक स्थल विश्वभर के तमाम सैलानियों को भी अपनी ओर बेहद आकर्षित करते हैं। ऐसा ही एक बेहद खूबसूरत पर्यटक स्थल उत्तराखंड का नैनीताल जनपद भी है जिसे सरोवर नगरी के नाम से जाना जाता है। नैनीताल सरोवर नगरी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इसे धोखे से अंग्रेजों ने हम से हासिल किया था। आपको बता दे नैनीताल उत्तराखंड का वह खूबसूरत जनपद है जो अपनी हसीन वादियों और झीलों के लिए विश्व भर में काफी प्रसिद्ध है। इतना ही नही यहाँ पर वर्षभर पर्यटकों की भारी संख्या में आवाजाही देखने को भी मिलती है। दरअसल नैनीताल की खूबसूरती और ठंडी आबोहवा सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती है। नैनीताल को सरोवर नगरी के नाम से जाना जाता है यह बात लगभग सभी लोगों को पता होगी लेकिन इसका इतिहास बेहद ही कम लोग जानते होंगे। तो चलिए आज हम आप लोगों को रूबरू करवाते हैं नैनीताल के इतिहास से जिसे अंग्रेजों ने धोखे से हासिल किया था।
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आपको जानकारी देते चलें नैनीताल समुद्रतल से 1938 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नैनी झील नैनीताल जनपद का एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र माना जाता है। नैनीताल के बारे में ऐसा कहा जाता है कि 18 नवम्बर वर्ष 1841 में ब्रिटिश व्यापारी पीटर बैरन ने नैनीताल जनपद की खोज की थी और उस समय नैनीताल में वास्तविक अधिकार स्थानीय निवासी दान सिंह थोकदार का था लेकिन आप लोगों को बता दें की पीटर बैरन को नैनीताल की खूबसूरती इतनी पसंद आई थी कि वह इस इलाके को किसी भी कीमत पर खरीदना चाहते थे। तभी इस क्षेत्र को खरीदने के लिए पीटर बैरन ने दान सिंह थोकदार से बात की और दान सिंह थोकदार इसे बेचने के लिए तुरंत तैयार हो गए। इतना ही नही नैनीताल का भ्रमण कर पीटर बैरन ने मन ही मन यहां एक शहर बसाने का निर्णय कर लिया था।
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कहा जाता है कि दान सिंह थोकदार ने अचानक ही इस इलाके को बेचने का अपना निर्णय बदल दिया और उन्होंने इस इलाके को बेचने से इनकार कर दिया। अगले दिन बैरन उन्हें अपने साथ नाव में बैठाकर नैनी झील के भ्रमण पर निकल पडे। जैसे ही वह नैनी झील के बीचों- बीच पहुंचे तभी बैरन ने थोकदार सिंह के साथ एक चाल चली और उन्होंने थोकदार को डराते हुए कहा कि इस क्षेत्र को खरीदने के लिए मैं तुम्हें मुंह मांगी कीमत देने के लिए तैयार हूं और अगर तुमने अपना इरादा नहीं बदला तो मैं तुम्हें इस ही झील में डूबो दूंगा। आपको बता दें पीटर बैरन ने अपनी पुस्तक नैनीताल की खोज में लिखा कि डूबने के भय से दान सिंह ने स्टांप पेपर पर तुरंत हस्ताक्षर कर दिए और इसके बाद यहां पर कल्पनाओं का शहर नैनीताल बसाया गया।

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सुनील खर्कवाल लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और संपादकीय क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान रखते हैं।

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